:
Breaking News

नीतीश का परिवारवाद विरोधी रुख अब सवालों में, बेटे निशांत की जेडीयू में एंट्री ने बदल दी तस्वीर

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटना: बिहार की राजनीति में हमेशा परिवारवाद के विरोधी माने जाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश ने सियासी परिदृश्य बदल दिया है। नीतीश ने वर्षों तक लालू यादव और अन्य परिवारवादी नेताओं की आलोचना करते हुए खुद को परिवारवाद से दूर रखा। उन्होंने कई मौकों पर कहा कि कर्पूरी ठाकुर की प्रेरणा से उन्होंने अपने परिवार को राजनीति में नहीं बढ़ाया।
लेकिन अब उनके बेटे निशांत कुमार ने शनिवार को जेडीयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। इससे विरोधियों को नीतीश की आलोचना का अवसर मिल गया है कि वे अपने लंबे आदर्श और समाजवादी विचारधारा पर कायम नहीं रहे। राजनीति में परिवारवाद को नुकसानदेह मानने वाले नीतीश ने अब खुद अपने परिवार को सक्रिय राजनीति में आने की अनुमति दे दी।
नीतीश के जीवन और भाषणों से यह साफ रहा कि वे परिवारवादी राजनीति के खिलाफ रहे। 5 जून 2018 को उन्होंने कहा था कि आज के युवा अपनी क्षमता से नहीं, बल्कि परिवार के सहारे आगे बढ़ते हैं। 2020 में विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने तेजस्वी यादव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोग सिर्फ खून के रिश्ते के आधार पर राजनीति में आगे बढ़ते हैं। इसी तरह 24 जनवरी 2024 को कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर उन्होंने कहा था कि कर्पूरी जी ने कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया और उन्होंने भी अपने परिवार को राजनीति में नहीं बढ़ाया।
नीतीश के बेटे निशांत के राजनीतिक कदम ने इन आदर्शों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय तक राजनीति से दूर रहने वाले निशांत ने पहले अपने गांव में पिता के कामों की सराहना करते हुए राजनीति में आने का संकेत दिया था। इसके बाद भी उन्होंने राजनीतिक सवालों पर हमेशा संयमित और सधे अंदाज में प्रतिक्रिया दी।
नीतीश ने जब तक विरोधियों के सवालों का सामना किया, तब तक उन्होंने चुप्पी साधी रही। लेकिन जेडीयू कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के समर्थन और संकेत के बाद निशांत ने औपचारिक रूप से पार्टी ज्वाइन कर ली। इस कदम ने स्पष्ट किया कि अब बिहार की राजनीति में वंशवाद और पारिवारिक हस्तक्षेप की बहस फिर से गरमा गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि निशांत की एंट्री से जेडीयू के भीतर नए समीकरण बनेंगे और पार्टी की रणनीति पर भी असर पड़ेगा। विरोधियों के लिए यह एक मौका है कि वे नीतीश के परिवारवाद विरोधी आदर्श और उनके बेटे की राजनीतिक एंट्री के बीच विरोधाभास को उजागर करें। अब सवाल यह है कि नीतीश कुमार अपने आदर्शों और समाजवादी छवि के साथ इस कदम को कैसे जोड़ेंगे और जनता के बीच इसे कैसे समझाएंगे।

संपादकीय 

नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा परिवारवाद विरोधी रही है, लेकिन अब उनके बेटे निशांत की सक्रियता ने राजनीति में नए सवाल पैदा कर दिए हैं। क्या यह कदम जेडीयू और बिहार की राजनीति के लिए रणनीतिक लाभ लेकर आएगा या आलोचना का कारण बनेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। यह वह मोड़ है जहां बिहार की राजनीतिक सोच और जनता की अपेक्षाएं दोनों एक नई दिशा में बदल रही हैं।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *